शहर की दहलीज पर
शहर की दहलीज पर सुविधाओं के लिए जूझता एक कस्बा, जो खड़ा हैं दहलीज पर शहर की, शहर होने के लिए इस उम्मीद के साथ, कि होती योजनाओं की बारिश में कुछ बूंदे उस पर भी गिरे, गिरती बूंदों को वह समाँ सके अपने धरातल पर, समेट सके उन्हें अपने आँचल में, इन बूंदों के सहारे, तृप्त कर सकें अपने दशकों की पिपासा को, खत्म कर सके सुविधाओं के सूखे को और बो सके कुछ बीज विकास के, हाँ एक कस्बा खड़ा हैं, दहलीज पर शहर की, शहर होने के लिए इस उम्मीद के साथ, कि आये सुविधाओं की सुनामी और बहा ले जाये सारी अव्यवस्थाओं को तोड़ दे सारी बंदिशें, मिटा दे सारी अड़चने और बहा ले जाएं कस्बे को, दहलीज के पार शहर की। @पुरु शर्मा