शिकागो व्याख्यान: हमारी सुशप्त स्मृतियों को झकझोरते स्वामी विवेकानंद
शिकागो व्याख्यान: हमारी सुशप्त स्मृतियों को झकझोरते स्वामी विवेकानंद स्वामी जी का व्याख्यान और आचरण पराधीन सुषुप्त धमनियों में रक्त संचार का स्त्रोत रहा। उन्होंने हमारी शिथिल हो चुकी मनोवृत्ति को झँकझोरा और विश्व को बताया कि हम किन महान अपादानों से बने हैं। कौन सा खून हमारी नसों में बह रहा है। विश्व मंच पर सभी धर्मों के प्रतिनिधित्वकर्ताओं की उपस्थिति में उन्होंने अपनी गौरवशाली अतीत को स्मरित करते हुए कहा कि हमने उस पावन पूण्य भूमि में जन्म लिया है जहाँ मनुष्य-प्रकृति तथा अंतर्जगत के रहस्योद्घाटन की जिज्ञासाओं के अंकुर उगे थे, हम उस सनातन की संतान हैं जहाँ आत्मा का अमरत्व, अंतर्यामी ईश्वर एवं जगतप्रपंच तथा मनुष्य के भीतर व्याप्त सर्वव्यापी परमात्मा विषयक का पहलेपहल उद्भव हुआ था। pic credit- Google स्वामी जी हमारी संस्कृति के उद्घोषक पुरुष है। वह विश्व को याद दिलाते है कि भारत ही सभी धर्मों की जन्मस्थली है, यह वही भूमि है, वही देश है यहाँ से उमड़ती हुई बाढ़ की तरह धर्म और दार्शनिक तत्वों ने समग्र संसार को बार-बार पल्लवित किया और जो शताब्दियों के आघात एवं विदेशियों के शत...