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मानवता के लिए खतरनाक है पर्यावरण से खिलवाड़

मानवता के लिए खतरनाक है पर्यावरण से खिलवाड़   स्वच्छ प्रकृति का साथ पुरखों की तरह होता है। प्रकृति का सानिध्य हमेशा हमें अपनापन देता है, संरक्षण देता है। एकमात्र यही वह जगह है जहाँ हमारी भौतिक उपलब्धियों का ब्यौरा नही लिया जाता। हमारी असफलताओं का हिसाब नही माँगा जाता है। भारतीय सनातन संस्कृति में सदियों से प्रकृति के समस्त उपादान श्रद्धा के केंद्र रहे हैं। प्रकृति हमारे दैनिक-सामाजिक जीवन को सुचारू, सरल और सहज बनाएँ रखती है, साथ ही स्वस्थमय, रचनात्मकता से भरपूर्ण परिवेश उपलब्ध कराती है जिसके सानिध्य में हम जीवन के नित नए प्रतिमान गढ़ते हैं।  किंतु आज का स्वार्थी मानव लगातार माँ स्वरूपी इस प्रकृति के सुंदर रूप से छेड़छाड़ कर रहा है। अपने निजी लाभ के लिए संसाधनों का निरंतर दोहन कर पर्यावरण असंतुलन की समस्या को जन्म दे दिया है। जिसकी परिणीति आज आपदाओं के रूप में हमारे सामने दृष्टिगोचर होती है। अभी हाल ही में उत्तराखंड के चमोली जिले में गैलिशियर पिघलने की घटना भी एक मानव जनित आपदा है। यहां यह समझना जरूरी है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक आपदा नहीं है। हर बार एक रुकावट यानी बांध को तोड़...

दिल्ली नतीजे : पारंपरिक राजनीति पर करारा तमाचा

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दिल्ली नतीजें : पारंपरिक राजनीति पर करारा तमाचा? दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजें आ चुके हैं और जैसा कि अनुमान था अरविंद केजरीवाल दोबारा दिल्ली के मुख्यमंत्री होंगे। इस चुनाव की बढ़ी बात यह रही कि तमाम भटकावों के प्रयास के बीच दिल्ली की जनता ने केजरीवाल व उनके कार्यों, योजनाओं पर अपना भरोसा कायम रखा और देश के तमाम राजनैतिक दलों को संदेश दिया कि सियासी पैंतरेबाजी छोड़कर जमीन पर आएं। इसे मतदाताओं व मुद्दों की जीत के तौर पर भी देखा जा सकता है।  चुनाव के दौरान केजरीवाल ने प्रधानमंत्री पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की, बल्कि उनके आर्थिक मॉडल की आलोचना की तथा देश में बढ़ती महंगाई बेरोज़गारी को मुद्दा बनाया और चुनाव को भारत-पाकिस्तान की जगह स्थानीय मुद्दों पर बनाएं रखा। इसके साथ ही जनता के बीच में अपने विकास कार्यों का प्रचार-प्रसार किया। हालाँकि यह बात अलग है कि आम आदमी पार्टी अपने पिछले कार्यकाल में किए वादों का 25% ही कर पाई लेकिन फिर भी जनता को अपनी ओर आकर्षित कर पाने सफल हुई और अंत में केजरीवाल की फ्री स्कीम जैसे बिजली और पानी, स्वास्थ्य इत्यादि इस चुनाव में हिट साबित हुए।...

जेएनयू की साख बची रहने दो!

जेएनयू को जनतांत्रिक शिक्षण संस्कृति के लिए जाना जाता है। जेएनयू की एक पूरी सांस्कृतिक विरासत है। जिसके निर्माण के पीछे एक विचार था देश में एक ऐसे शिक्षण संस्थान की स्थापना का जिसमें बौद्धिक खुलेपन, विकास-विवाद, सहमति-असहमति और स्वतंत्र जीवन शैली की पूरी गुंजाइश हो, जहाँ पैसे की तंगई प्रतिभाओं के आड़े न आएं। परिणामस्वरूप जेएनयू भारत के दूरदराज के इलाकों के दलित, आदिवासी, गरीब और पिछड़े वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों के सपनों को साकार करने वाला संस्थान बन गया। यहाँ संघर्ष का इतिहास लंबा है। छात्र हितों के लिए जेएनयू से हमेशा आवाज उठती रही है। ताजा मामला फीस वृद्धि का है जिसको लेकर जेएनयू छात्र सड़क पर है। किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकार की न्यूनतम प्राथमिकता मुफ़्त शिक्षा और स्वास्थ्य की होती है। शिक्षा पर सभी का समान अधिकार हो तथा सभी तक इसकी पहुँच हो इसके हेतु सरकार को प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए। जेएनयू छात्रों का यह प्रदर्शन वाज़िब है लेकिन काश जेएनयू के छात्र आत्मकेंद्रित न होकर देशभर के छात्रों की समस्या एवं महँगी होती शिक्षा को अपना मुख्य मुद्दा बनाते। आज जेएनयू को लेकर भारतीय-समाज दो ...

अभिनंदन की वापसी से सजा सियासी बाजार

अभिनंदन की वापसी से सजा सियासी बाजार भारतीय वायु सेना के जांबाज़ विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान की स्वदेश वापसी से देशभर में खुशी की लहर हैं। लोगों की जुबां पर अभिनंदन के शौर्य और पराक्रम की कहानी हैं, देश का कोना-कोना अभिनंदन के साहस को सलाम कर रहा हैं और उसके पराक्रम के सामने नतमस्तक हैं। होना भी चाहिए क्योंकि विंग कमांडर का साहस अदम्य हैं, अनुकरणीय हैं और गौरवान्वित करने वाला हैं किंतु दुर्भाग्य से इसे बाजार और सियासत की नजर लग गई हैं।  हर कोई अभिनंदन की वीरता को बेचने में लग गया हैं। कोई वोट के लिए, कोई पैसे के लिए, कोई अपने व्यापार के लिए। अभिनंदन के शौर्य को भुनाने के लिए सियासी दल और बाजार मुँह खोले बैठे हैं। सारे रास्ते-चौराहे अभिनंदन और प्रधानमंत्री की तस्वीरों वाले होल्डिंगों से भरे पड़े हैं, चुनावी रथ सेना के शौर्य से लदे हैं। वे अभिनंदन और एयर स्ट्राइक के नाम की बंशी बजा अपने सरकते जनाधार को बचाने तथा लोगों को अपने पाले में करने की जुगत में हैं। एयर स्ट्राइक पर कर्नाटक में एक नेता सीटें गिन रहे हैं। अभिनंदन इन लोगों के लिए सियासी माल बन गए हैं जिसका भरपूर इस्तेमाल स...

चर्चाओं में 'मैं भी चौकीदार' कैम्पेन

चर्चाओं में 'मैं भी चौकीदार' कैम्पेन  देश के प्रधान सेवक, चौकीदार नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट कर 'मैं भी चौकीदार' कैम्पेन चालू किया जो अब ट्विटर से लेकर फेसबुक सभी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर ट्रेंड करने लगा हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार सुबह 'मैं भी चौकीदार' हैशटैग के साथ ट्वीट किया था।  इस ट्वीट में पीएम मोदी ने कहा था, 'आपका चौकीदार मजबूती से खड़ा है और देश की सेवा कर रहा है। लेकिन, मैं अकेला नहीं हूं। हर कोई जो भ्रष्टाचार, गंदगी और सामाजिक बुराइयों से लड़ा रहा है, वह चौकीदार है। भारत की प्रगति के लिए जो भी कड़ी मेहनत कर रहा है, वह चौकीदार है। आज हर भारतीय कह रहा है, मैं भी चौकीदार।' इसके साथ ही उन्होंने तीन मिनट 45 सेकंड का वीडियो भी शेयर किया था जिसमें वह कहते हैं कि आप आश्वस्त रहिए, आपका चौकीदार चौकन्ना है। इसके बाद एक गाना बजता है, जिसमें लोगों को यह कहते हुए दिखाया जाता है कि मैं भी चौकीदार हूं। अब यह अभियान जोर पकड़ता जा रहा हैं। हर कोई खुद को चौकीदार कह रहा हैं, हर गली-मोहल्ले में चौकीदार के ही चर्चे है...