करीला धाम : जहाँ विराजती माँ जानकी
loading... विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं की रमणीय वादियों की गोद में बसा अलौकिक शक्ति और आस्था का केंद्र करीला धाम। शहर के कोलाहल से दूर, शांतिमय वातावरण में हरितमा की चादर ओढ़े विंध्य की हसीन वादियों से घिरा भगवान वाल्मीकि का आश्रम। यहाँ की पावन धरा पर पहुँचते ही सांसारिक मायाजाल में जकड़े मानव की समस्त व्याधियों का समाधान करती हैं माँ जानकी। माँ जानकी का यह मंदिर यहाँ आने वाले हर आगन्तुक को अपनी ओर आकर्षित करने में पूर्णतः सक्षम हैं। वाल्मीकि आश्रम और लव कुश की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध इस पावन भूमि की महिमा अपरंपार हैं। यहाँ का रमणीय वातावरण और माँ जानकी की आलौकिक छटा पर्यटकों और श्रद्धालुओं को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। बरसात के मौसम में पूरी घाटी हरितमा की चादर ओढ़ लेती हैं, जिसे देखना मनमोहक होता हैं और सर्दियों के समय इन घाटियों पर चाँदी सी चमकती धुंध छा जाती हैं। मंदिर के निकट ही विंध्याचल की घाटियों की तलहटी में माँ जानकी के चरणों को धोती हुई श्वेत धवल चाँदनी सी चमकती कोंचा नदी लहराती हुई चट्टानों के बीच से गुजरती हैं। जिला मुख्यालय अशोकनगर से 3...