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जेएनयू की साख बची रहने दो!

जेएनयू को जनतांत्रिक शिक्षण संस्कृति के लिए जाना जाता है। जेएनयू की एक पूरी सांस्कृतिक विरासत है। जिसके निर्माण के पीछे एक विचार था देश में एक ऐसे शिक्षण संस्थान की स्थापना का जिसमें बौद्धिक खुलेपन, विकास-विवाद, सहमति-असहमति और स्वतंत्र जीवन शैली की पूरी गुंजाइश हो, जहाँ पैसे की तंगई प्रतिभाओं के आड़े न आएं। परिणामस्वरूप जेएनयू भारत के दूरदराज के इलाकों के दलित, आदिवासी, गरीब और पिछड़े वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों के सपनों को साकार करने वाला संस्थान बन गया। यहाँ संघर्ष का इतिहास लंबा है। छात्र हितों के लिए जेएनयू से हमेशा आवाज उठती रही है। ताजा मामला फीस वृद्धि का है जिसको लेकर जेएनयू छात्र सड़क पर है। किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकार की न्यूनतम प्राथमिकता मुफ़्त शिक्षा और स्वास्थ्य की होती है। शिक्षा पर सभी का समान अधिकार हो तथा सभी तक इसकी पहुँच हो इसके हेतु सरकार को प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए। जेएनयू छात्रों का यह प्रदर्शन वाज़िब है लेकिन काश जेएनयू के छात्र आत्मकेंद्रित न होकर देशभर के छात्रों की समस्या एवं महँगी होती शिक्षा को अपना मुख्य मुद्दा बनाते। आज जेएनयू को लेकर भारतीय-समाज दो ...