मानवता के लिए खतरनाक है पर्यावरण से खिलवाड़
मानवता के लिए खतरनाक है पर्यावरण से खिलवाड़ स्वच्छ प्रकृति का साथ पुरखों की तरह होता है। प्रकृति का सानिध्य हमेशा हमें अपनापन देता है, संरक्षण देता है। एकमात्र यही वह जगह है जहाँ हमारी भौतिक उपलब्धियों का ब्यौरा नही लिया जाता। हमारी असफलताओं का हिसाब नही माँगा जाता है। भारतीय सनातन संस्कृति में सदियों से प्रकृति के समस्त उपादान श्रद्धा के केंद्र रहे हैं। प्रकृति हमारे दैनिक-सामाजिक जीवन को सुचारू, सरल और सहज बनाएँ रखती है, साथ ही स्वस्थमय, रचनात्मकता से भरपूर्ण परिवेश उपलब्ध कराती है जिसके सानिध्य में हम जीवन के नित नए प्रतिमान गढ़ते हैं। किंतु आज का स्वार्थी मानव लगातार माँ स्वरूपी इस प्रकृति के सुंदर रूप से छेड़छाड़ कर रहा है। अपने निजी लाभ के लिए संसाधनों का निरंतर दोहन कर पर्यावरण असंतुलन की समस्या को जन्म दे दिया है। जिसकी परिणीति आज आपदाओं के रूप में हमारे सामने दृष्टिगोचर होती है। अभी हाल ही में उत्तराखंड के चमोली जिले में गैलिशियर पिघलने की घटना भी एक मानव जनित आपदा है। यहां यह समझना जरूरी है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक आपदा नहीं है। हर बार एक रुकावट यानी बांध को तोड़...