प्रकृति की होली चढ़ा सूरज दुनिया की सीढ़ी लिए हाथ में गुलाल अपनी लालिमा से रंगने धरती के गाल अपनी लाल चादर उसने सारे जग में फैलाई हैं हर कोने में देखो होली आई हैं, होली आई हैं मंद मंद पवन धरती का आँचल सहलाती हैं पकी खड़ी फसल खेत में लहराती हैं होली आई होली आई पावन गीत गाती हैं खिले उन्नत फूल पलाश के धरती के माथे पर तिलक लगाते हैं झूम झूम कर होली आई होली आई गाते हैं पेड़ो ने भी नया रंग ओढ़ा हैं जितना भी कहे थोड़ा है देख शोभा धरती की कण कण में मस्ती छाई हैं चारों ओर कोयल करती गुंजन कि होली आई हैं निशा की चाँदनी ने भी चाँदी सा रंग घोला हैं डाल पर बैठा हर पंछी डोला हैं हर रंग, फिजा सबने हैप्पी होली बोला हैं @पुरु शर्मा