उपचुनाव: दांव पर सिंधिया की साख
उपचुनाव: दांव पर सिंधिया की साख
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| Pic credit- Google |
भाजपा ने भी इनका दारोमदार पूरी तरह से सिंधिया को सौंप दिया। इन सीटों पर भाजपा की जीत का श्रेय यदि सिंधिया के खाते में दर्ज होगा, तो हार का खामियाजा भी उन्हें झेलना है। उपचुनाव के नतीजे सिर्फ शिवराज सरकार को स्थायित्व नहीं देंगे, सिंधिया की भविष्य की राजनीति के लिए भी ये निर्णायक हैं। यही कारण है कि कांग्रेस ने 'गद्दार' और 'खुद्दार' के नारे को हवा दी है। लेकिन पलड़ा किस तरह झुकेगा ये कहना मुश्किल हैं, क्योंकि उपचुनाव वाले क्षेत्रों के मतदाता खामोश हैं। वे सबकी सुन तो रहे हैं, पर बोल नहीं रहे। ये उपचुनाव सिंधिया के सियासी फैसले के अलावा भाजपा के लिए भी नाक का सवाल बन गया। क्योंकि सिंधिया गुट की बगावत ने भाजपा को जो फ़ायदा दिलाया, इस उपचुनाव के नतीजे से उस पर जनता की मुहर लगेगी। कांग्रेस यदि मतदाताओं से सहानुभूति के नाम पर वोट मांग रही है, तो भाजपा और सिंधिया ने कांग्रेस की 15 महीने की सरकार के फैसलों को कटघरे में खड़ा करके अपने पक्ष में वोट देने की अपील की है। मतदाता का एक वोट कई सारे फैसलों को सही और गलत ठहराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।

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