प्रकृति की होली चढ़ा सूरज दुनिया की सीढ़ी लिए हाथ में गुलाल अपनी लालिमा से रंगने धरती के गाल अपनी लाल चादर उसने सारे जग में फैलाई हैं हर कोने में देखो होली आई हैं, होली आई हैं मंद मंद पवन धरती का आँचल सहलाती हैं पकी खड़ी फसल खेत में लहराती हैं होली आई होली आई पावन गीत गाती हैं खिले उन्नत फूल पलाश के धरती के माथे पर तिलक लगाते हैं झूम झूम कर होली आई होली आई गाते हैं पेड़ो ने भी नया रंग ओढ़ा हैं जितना भी कहे थोड़ा है देख शोभा धरती की कण कण में मस्ती छाई हैं चारों ओर कोयल करती गुंजन कि होली आई हैं निशा की चाँदनी ने भी चाँदी सा रंग घोला हैं डाल पर बैठा हर पंछी डोला हैं हर रंग, फिजा सबने हैप्पी होली बोला हैं @पुरु शर्मा
भारत में भाषा का प्रश्न कभी भी मात्र संचार का विषय नहीं रहा, यह संस्कृति, अस्मिता और राजनीति से भी गहराई से जुड़ा रहा है। विशेष रूप से हिंदी को लेकर, विभिन्न राज्यों में समर्थन और विरोध की धाराएँ लगातार चलती रही हैं। तमिलनाडु में हिंदी विरोध का स्वर सबसे मुखर रहा है, जिसे हाल ही में मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने पुनः हवा दी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह विरोध वास्तव में भाषाई असहमति का परिणाम है, या फिर यह राजनीति से प्रेरित एक सोचा-समझा कदम है? स्वतंत्रता के बाद, जब भारत को भाषाई आधार पर पुनर्गठित किया गया, तब यह स्पष्ट हो गया था कि विविध भाषाओं वाले इस देश में एक संप्रेषणीय माध्यम आवश्यक होगा। हिंदी, जिसे उस समय देश की लगभग 40% आबादी बोलती थी, इस भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त मानी गई। इसे 1950 में संविधान में आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और बाद में इंदिरा गांधी ने यह सुनिश्चित किया कि अंग्रेज़ी भी सह-आधिकारिक भाषा बनी रहे, जिससे गैर-हिंदी भाषी राज्यों को कोई असुविधा न हो। तमिलनाडु और कुछ अन्य राज्यों में यह आशंका व्यक्त की गई कि हिंदी के...
मितरों चुनावी पावरप्ले शुरू हो चूका है। सरकारी टीम के घोषणाओं के चौके-छक्के पर लगाम लग चुकी है और इस पावरप्ले के लागू होते ही सभी पावर वालों का पावर छीन गया और अब ऐसी स्थिति में ये शीघ्र ही आपके घर की कूच करेंगे और आपसे उनकी टीम की तरफ से खेलने के लिए साम, दण्ड, भेद सभी तरह से आकर्षित करेंगे। और साथ ही बहुत सी टीमें भी हैं मैदान में जो इस चुनावी मैच में अपनी किस्मत आजमा रही। वो भी आपको तरह-तरह के प्रलोभन द्वारा अपनी तरफ करने का भरपूर प्रयास करेंगी। कुल मिला कर मैच में मजा बहुत आना है। इस पावरप्ले में जनता ही मैच विनर प्लेयर होगी, सो जनता की खातिरदारी भी खूब होगी और हाँ मैच का परिणाम 11 दिसंबर को आएगा। इस पावरप्ले में चुनाव आयोग ही सर्वशक्तिशाली खिलाडी होगा और साथ ही फ़ील्ड और थर्ड अंपायर भी।
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