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चलिए थोड़ा मुस्कुराते है

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उपचुनाव: दांव पर सिंधिया की साख

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loading...  उपचुनाव: दांव पर सिंधिया की साख Pic credit- Google मध्यप्रदेश की राजनीति के केंद्र में इन दिनों ज्योतिरादित्य सिंधिया छाए हुए हैं क्योंकि, ये उनके राजनीतिक जीवन का सबसे प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव है। उनके 19 विश्वस्त साथियों के बहाने उनकी साख दांव पर लगी है। 28 विधानसभा सीटों पर मध्यप्रदेश में हो रहे उपचुनाव दो बड़ी पार्टियों कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवारों के बीच की महज सियासी जंग नहीं है। ये उपचुनाव सीधे-सीधे ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के फैसले को सही और गलत ठहराने का इम्तिहान है। इसे उनकी राजनीति की अग्निपरीक्षा भी माना जा सकता! यदि वे इस परीक्षा में सफल होते हैं, तो उनके लिए भाजपा के नए दरवाजे खुल जाएंगे। पर, यदि ऐसा नहीं होता है, तो उपचुनाव की हार का सारा खामियाजा सिंधिया पर थोपा जाना तय है। ऐसे में उनके साथी भी उनसे कन्नी काट सकते हैं। उपचुनाव की 28 में से 19 सीटें ऐसी हैं, जो सीधे सिंधिया-घराने के प्रभाव में है।  भाजपा ने भी इनका दारोमदार पूरी तरह से सिंधिया को सौंप दिया। इन सीटों पर भाजपा की जीत का श्रेय यदि सिंधिया...

श्री कृष्ण: श्रीमद्भगवद गीता

loading... श्रीकृष्ण के उपदेशों को भूलते हम  श्रीकृष्णचन्द्र को पूर्णावतार कहा गया है जिनमें सभी कलाओं का पूर्णरूपेण विकास हुआ है। यदि बचपन में ही उन्होंने गोपियों के प्रति अलौकिक, असाधारण प्रेम का परिचय दिया है तो उसी अवस्था में दूसरी ओर कंस के भेजे हुए अनेकानेक असुरों का वध करके अलौकिक शक्ति और शौर्य का भी दृष्टान्त उपस्थित किया है। यदि गीता का ज्ञान रण-स्थल में उन्होंने अर्जुन को दिया है तो समय-समय पर अपनी चातुरी और सांसारिक बुद्धिमत्ता से पाण्डवों को अर्थ-संकट और धर्म-संकट से भी बचाया। यदि वह अनेक रानियों और पटरानियों के पति हुए हैं तो साथ ही स्थिरप्रज्ञ योगी भी रहे हैं। श्रीकृष्ण शास्त्र-शस्त्रविद् हैं, कला-कोविद हैं, राजनीति-विशारद हैं, योगी हैं, दार्शनिक हैं। सभी एक साथ हैं और सबमें महान् हैं। जब हम श्री कृष्ण के समग्र जीवन को देखते हैं तो मुख्यतः हमें उनके तीन रूप दिखाये देते हैं 1) धर्म संस्थापक कर्मयोगी कृष्ण 2) गोपी जनवल्लभ और राधाकृष्ण 3) बाल गोपाल ऐतिहासिक-आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से कृष्णचरित्र का प्रथम रूप सबसे अधिक महत्वपूर्ण और आत्मसात करने योग्य है। यह...

शिकागो व्याख्यान: हमारी सुशप्त स्मृतियों को झकझोरते स्वामी विवेकानंद

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  शिकागो व्याख्यान: हमारी सुशप्त स्मृतियों को झकझोरते स्वामी विवेकानंद स्वामी जी का व्याख्यान और आचरण पराधीन सुषुप्त धमनियों में रक्त संचार का स्त्रोत रहा। उन्होंने हमारी शिथिल हो चुकी मनोवृत्ति को झँकझोरा और विश्व को बताया कि हम किन महान अपादानों से बने हैं। कौन सा खून हमारी नसों में बह रहा है। विश्व मंच पर सभी धर्मों के प्रतिनिधित्वकर्ताओं की उपस्थिति में उन्होंने अपनी गौरवशाली अतीत को स्मरित करते हुए कहा कि हमने उस पावन पूण्य भूमि में जन्म लिया है जहाँ मनुष्य-प्रकृति तथा अंतर्जगत के रहस्योद्घाटन की जिज्ञासाओं के अंकुर उगे थे, हम उस सनातन की संतान हैं जहाँ आत्मा का अमरत्व, अंतर्यामी ईश्वर एवं जगतप्रपंच तथा मनुष्य के भीतर व्याप्त सर्वव्यापी परमात्मा विषयक का पहलेपहल उद्भव हुआ था। pic credit- Google    स्वामी जी हमारी संस्कृति के उद्घोषक पुरुष है। वह विश्व को याद दिलाते है कि भारत ही सभी धर्मों की जन्मस्थली है, यह वही भूमि है, वही देश है यहाँ से उमड़ती हुई बाढ़ की तरह धर्म और दार्शनिक तत्वों ने समग्र संसार को बार-बार पल्लवित किया और जो शताब्दियों के आघात एवं विदेशियों के शत...

कोरोना वायरस से बचाव के उपाय

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कोरोना वायरस से बचाव के उपाय कोरोना वायरस (प्राण घातक) जो चीन में तेजी से फैलता जा रहा है, जिसका भारत में भी आने का खतरा है, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए लोगों से इनमे से कुछ सावधानियाँ बरतने को कहा है । कोरोना वायरस से बचाव के लिए निम्न सावधानियां बरतें: 1 . पानी उबालकर पियें । 2 . मांसाहार खाना बंद कर दें । 3. आहार में विटामिन सी, जिंक और विटामिन बी कॉन्प्लेक्स देने वाले पदार्थों की मात्रा बढ़ा दें । 4 . व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें । 5 . तुलसी, अदरक, काली मिर्च, मिश्री और कुछ बूंदे नींबू की डालकर काढ़ा बनाकर पीए l 6 . गिलोय का सेवन सुबह खाली पेट करें । 7 . भोजन में सब्जियों का सूप भी लें । 8 . किसी भी प्रकार का पेय पदार्थ (कोल्ड ड्रिंक्स) आइसक्रीम, कुल्फी आदि खाने से बचें । 9 .किसी भी प्रकार का बंद डिब्बा भोजन, पुराना बर्फ का गोला, सील बंद दूध तथा दूध से बनी हुई मिठाइयाँ जो कि 48 घंटे से पहले की बनी हो उसे नहीं खावे। इन सभी चीजों का इस्तेमाल  कम से कम 90 दिनों तक न करें। 10. विश्व स्वास्थ्य संगठन क...

दिल्ली नतीजे : पारंपरिक राजनीति पर करारा तमाचा

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दिल्ली नतीजें : पारंपरिक राजनीति पर करारा तमाचा? दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजें आ चुके हैं और जैसा कि अनुमान था अरविंद केजरीवाल दोबारा दिल्ली के मुख्यमंत्री होंगे। इस चुनाव की बढ़ी बात यह रही कि तमाम भटकावों के प्रयास के बीच दिल्ली की जनता ने केजरीवाल व उनके कार्यों, योजनाओं पर अपना भरोसा कायम रखा और देश के तमाम राजनैतिक दलों को संदेश दिया कि सियासी पैंतरेबाजी छोड़कर जमीन पर आएं। इसे मतदाताओं व मुद्दों की जीत के तौर पर भी देखा जा सकता है।  चुनाव के दौरान केजरीवाल ने प्रधानमंत्री पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की, बल्कि उनके आर्थिक मॉडल की आलोचना की तथा देश में बढ़ती महंगाई बेरोज़गारी को मुद्दा बनाया और चुनाव को भारत-पाकिस्तान की जगह स्थानीय मुद्दों पर बनाएं रखा। इसके साथ ही जनता के बीच में अपने विकास कार्यों का प्रचार-प्रसार किया। हालाँकि यह बात अलग है कि आम आदमी पार्टी अपने पिछले कार्यकाल में किए वादों का 25% ही कर पाई लेकिन फिर भी जनता को अपनी ओर आकर्षित कर पाने सफल हुई और अंत में केजरीवाल की फ्री स्कीम जैसे बिजली और पानी, स्वास्थ्य इत्यादि इस चुनाव में हिट साबित हुए।...

जेएनयू की साख बची रहने दो!

जेएनयू को जनतांत्रिक शिक्षण संस्कृति के लिए जाना जाता है। जेएनयू की एक पूरी सांस्कृतिक विरासत है। जिसके निर्माण के पीछे एक विचार था देश में एक ऐसे शिक्षण संस्थान की स्थापना का जिसमें बौद्धिक खुलेपन, विकास-विवाद, सहमति-असहमति और स्वतंत्र जीवन शैली की पूरी गुंजाइश हो, जहाँ पैसे की तंगई प्रतिभाओं के आड़े न आएं। परिणामस्वरूप जेएनयू भारत के दूरदराज के इलाकों के दलित, आदिवासी, गरीब और पिछड़े वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों के सपनों को साकार करने वाला संस्थान बन गया। यहाँ संघर्ष का इतिहास लंबा है। छात्र हितों के लिए जेएनयू से हमेशा आवाज उठती रही है। ताजा मामला फीस वृद्धि का है जिसको लेकर जेएनयू छात्र सड़क पर है। किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकार की न्यूनतम प्राथमिकता मुफ़्त शिक्षा और स्वास्थ्य की होती है। शिक्षा पर सभी का समान अधिकार हो तथा सभी तक इसकी पहुँच हो इसके हेतु सरकार को प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए। जेएनयू छात्रों का यह प्रदर्शन वाज़िब है लेकिन काश जेएनयू के छात्र आत्मकेंद्रित न होकर देशभर के छात्रों की समस्या एवं महँगी होती शिक्षा को अपना मुख्य मुद्दा बनाते। आज जेएनयू को लेकर भारतीय-समाज दो ...